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Patriotic Shayari (Hindi)

  1. #16
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    Default यह हिंदुस्तान है

    यह हिंदुस्तान है अपना
    हमारे युग-युग का सपना
    हरी धरती है नीलगगन
    मगन हम पंछी अलबेले

    मुकुट-सा हिमगिरि अति सुंदर
    चरण रज लेता रत्नाकर
    हृदय गंगा यमुना बहती
    लगें छ: ऋतुओं के मेले

    राम-घनश्याम यहाँ घूमे
    सूर-तुलसी के स्वर झूमे
    बोस-गांधी ने जन्म लिया
    जान पर हँस-हँस जो खेले

    कर्म पथ पर यह सदा चला
    ज्ञान का दीपक यहाँ जला
    विश्व में इसकी समता क्या
    रहे हैं सब इसके चेले।

    - डॉ. गोपालबाबू शर्मा

  2. #17
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    मातृ-भू, शत-शत बार प्रणाम
    ऐ अमरों की जननी, तुमको शत-शत बार प्रणाम,
    मातृ-भू शत-शत बार प्रणाम।
    तेरे उर में शायित गांधी, 'बुद्ध औ' राम,
    मातृ-भू शत-शत बार प्रणाम।

    हिमगिरि-सा उन्नत तव मस्तक,
    तेरे चरण चूमता सागर,
    श्वासों में हैं वेद-ऋचाएँ
    वाणी में है गीता का स्वर।
    ऐ संसृति की आदि तपस्विनि, तेजस्विनि अभिराम।
    मातृ-भू शत-शत बार प्रणाम।

    हरे-भरे हैं खेत सुहाने,
    फल-फूलों से युत वन-उपवन,
    तेरे अंदर भरा हुआ है
    खनिजों का कितना व्यापक धन।
    मुक्त-हस्त तू बाँट रही है सुख-संपत्ति, धन-धाम।
    मातृ-भू शत-शत बार प्रणाम।

    प्रेम-दया का इष्ट लिए तू,
    सत्य-अहिंसा तेरा संयम,
    नयी चेतना, नयी स्फूर्ति-युत
    तुझमें चिर विकास का है क्रम।
    चिर नवीन तू, ज़रा-मरण से -
    मुक्त, सबल उद्दाम, मातृ-भू शत-शत बार प्रणाम।

    एक हाथ में न्याय-पताका,
    ज्ञान-द्वीप दूसरे हाथ में,
    जग का रूप बदल दे हे माँ,
    कोटि-कोटि हम आज साथ में।
    गूँज उठे जय-हिंद नाद से -
    सकल नगर औ' ग्राम, मातृ-भू शत-शत बार प्रणाम।

    - भगवती चरण वर्मा

  3. #18
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    भारत क्यों तेरी साँसों के, स्वर आहत से लगते हैं,
    अभी जियाले परवानों में, आग बहुत-सी बाकी है।
    क्यों तेरी आँखों में पानी, आकर ठहरा-ठहरा है,
    जब तेरी नदियों की लहरें, डोल-डोल मदमाती हैं।

    जो गुज़रा है वह तो कल था, अब तो आज की बातें हैं,
    और लड़े जो बेटे तेरे, राज काज की बातें हैं,
    चक्रवात पर, भूकंपों पर, कभी किसी का ज़ोर नहीं,
    और चली सीमा पर गोली, सभ्य समाज की बातें हैं।

    कल फिर तू क्यों, पेट बाँधकर सोया था, मैं सुनता हूँ,
    जब तेरे खेतों की बाली, लहर-लहर इतराती है।

    अगर बात करनी है उनको, काश्मीर पर करने दो,
    अजय अहूजा, अधिकारी, नय्यर, जब्बर को मरने दो,
    वो समझौता ए लाहौरी, याद नहीं कर पाएँगे,
    भूल कारगिल की गद्दारी, नई मित्रता गढ़ने दो,

    ऐसी अटल अवस्था में भी, कल क्यों पल-पल टलता है,
    जब मीठी परवेज़ी गोली, गीत सुना बहलाती है।

    चलो ये माना थोड़ा गम है, पर किसको न होता है,
    जब रातें जगने लगती हैं, तभी सवेरा सोता है,
    जो अधिकारों पर बैठे हैं, वह उनका अधिकार ही है,
    फसल काटता है कोई, और कोई उसको बोता है।

    क्यों तू जीवन जटिल चक्र की, इस उलझन में फँसता है,
    जब तेरी गोदी में बिजली कौंध-कौंध मुस्काती है।

    - अभिनव शुक्ला

  4. #19
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    भारत तुझसे मेरा नाम है,
    भारत तू ही मेरा धाम है।
    भारत मेरी शोभा शान है,
    भारत मेरा तीर्थ स्थान है।
    भारत तू मेरा सम्मान है,
    भारत तू मेरा अभिमान है।
    भारत तू धर्मों का ताज है,
    भारत तू सबका समाज है।
    भारत तुझमें गीता सार है,
    भारत तू अमृत की धार है।
    भारत तू गुरुओं का देश है,
    भारत तुझमें सुख संदेश है।
    भारत जबतक ये जीवन है,
    भारत तुझको ही अर्पण है।
    भारत तू मेरा आधार है,
    भारत मुझको तुझसे प्यार है।
    भारत तुझपे जां निसार है,
    भारत तुझको नमस्कार है।

    -अशोक कुमार वशिष्ट

  5. #20
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    सिंह हो तो उठो गर्जना करो
    और सियार हो, तो कुछ कहना नही है ।
    दुष्मन के वार पर पलट वार तो करो
    गर कायर हो, तो कुछ करना नही है ।

    अपनी संख्या पर गर नाज़ है तुम्हें
    उस नाज़ जैसा कुछ तो कर गुजरो
    वरना तो कीडे भी जन्मते हैं करोडों
    मरना है जो कीडों सा, कुछ कहना नही है ।

    जिनके बाजू मे है ताकत और हिम्मत
    एक बार जोश से उनकी जयकार तो करो
    भरलो स्वयं में उनका ये जज्बा जोश का
    कमजोर ही रहना है, तो कुछ कहना नही है ।

    घर और पाठशाला बने केंद्र नीति का
    राष्ट्र प्रेम से बच्चों को कर दो ओत प्रोत
    हर बच्चा बनें एक आदर्श सैनिक भी
    सिखाओ ये पाठ कभी डरना नही है ।


    समय पडे तो खुद ललकारो दुश्मन को
    एक दिन तो हम सबको मरना यहीं है
    डिस्को नही, हमको है तांडव की जरूरत
    वरना हम जैसों की फिर सजा यही है ।

  6. #21
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    Wow!! simply great....please write the name of authors/poets in bigger fonts. Thank you.

  7. #22
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    Thumbs up देश वासियों याद करो

    देश वासियों याद करो तुम उन महान बलिदानों को।
    देश के खातिर जान लुटाई, देश की उन संतानों को।


    जिनके कारण तान कर छाती खड़ा यह पर्वतराज है।
    जिनके चलते सबके सर पर आज़ादी का ताज है।
    महाकाल भी काँपा जिनसे मौत के उन परवानों को।

    देश वासियों याद करो...

    देख कर टोली देव भी बोले देखो-देखो वीर चले।
    गर पर्वत भी आया आगे, पर्वत को वो चीर चले।
    जिनसे दुश्मन डर कर भागे ऐसे वीर जवानों को।

    देश वासियों याद करो...

    जिनने मौत का गीत बजाया अपनी साँसों की तानों पर।
    पानी फेरा सदा जिन्होंने दुश्मन के अरमानों पर।
    मेहनत से जिनने महल बनाया उजड़े हुए वीरानों को।

    देश वासियों याद करो...

    हँस-हँस कर के झेली गोली जिनने अपने सीनों पर।
    अंत समय में सो गए जो रख कर माथा संगीनों पर।
    शत-शत नमन कर रहा है मन मेरा ऐसे दीवानों को।

    देश वासियो याद करो...

    - विकास परिहार

  8. #23
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    Default हमारा तिरंगा




    हवा मे फहराता
    यह है हमारा झंड़ा
    रंगो मे रंगबिरंगा
    यह है हमारा तिरंगा ।।

    आज़ादी का है यह निशान
    है इसपर हम सब कुर्बान
    यह दीप है हम पतंगा
    यह है हमारा तिरंगा ।।

    हम सब का है यह सम्मान
    हम सब की है यह पहचान
    यह वस्त्र है हम धागा
    यह है हमारा तिरंगा ।।

    लेते हैं हथेली पर जान
    देखकर इसे जवान
    यह महासागर है हम गंगा
    यह है हमारा तिरंगा ।।

    मुश्किल नही कोई भी काम
    जब करते हैं इसे सलाम
    समझ लो तुम यह सारंगा
    यह है हमारा तिरंगा ।।

    जब जब यह लहरायेगा
    देशभक्ति के किरणोंको फैलायेगा
    सबमें फिरसे उम्मीद जगायेगा
    ऐसा है हमारा तिरंगा ।।

  9. #24
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    Thumbs up स्वतंत्र भारत की ध्वजा - रामधारी सिंह दिनक

    नमो स्वतंत्र भारत की ध्वजा, नमो, नमो !
    नमो नगाधिराज श्रृंग की विहारिणी !
    नमो अनंत सौख्य-शक्ति-शील-धारिणी!
    प्रणय-प्रसारिणी, नमो अरिष्ट-वारिणी!
    नमो मनुष्य की शुभेषणा-प्रचारिणी!
    नवीन सूर्य की नयी प्रभा,नमो, नमो!

    हम न किसी का चाहते तनिक, अहित, अपकार।
    प्रेमी सकल जहान का भारतवर्ष उदार।
    सत्य न्याय के हेतु
    फहर फहर ओ केतु
    हम विचरेंगे देश-देश के बीच मिलन का सेतु
    पवित्र सौम्य, शांति की शिखा, नमो, नमो!


    तार-तार में हैं गुंथा ध्वजे, तुम्हारा त्याग!
    दहक रही है आज भी, तुम में बलि की आग।
    सेवक सैन्य कठोर
    हम चालीस करोड़ *
    कौन देख सकता कुभाव से ध्वजे, तुम्हारी ओर
    करते तव जय गान
    वीर हुए बलिदान,
    अंगारों पर चला तुम्हें ले सारा हिन्दुस्तान!
    प्रताप की विभा, कृषानुजा, नमो, नमो!

  10. #25
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    Default can anyone explain what this poem means ?? An english translation to it please ...

    Quote Originally Posted by Esha_sachdeva View Post
    मेरा यह मानना है
    मेरा भारत सब दशों से महान है।
    नहीं है ऐसा कोई अन्य देश,
    युगों बीतने पर भी वैसा ही है परिवेश,
    विभिन्नता में एकता के लिए, प्रसिद्ध है हर प्रदेश,
    प्रेम, अहिंसा, भाईचारे का जो है देता संदेश।


    मेरा यह मानना है
    मेरा भारत सब देशों से महान है।
    ऋषि-मुनियों की जो है तपोभूमि,
    कई नदियों से भरी है ये पुण्य भूमि,
    प्रकृति का है मस्त नजारा यहाँ,
    छोड़ इसे जाए हम और अब कहाँ


    मेरा यह मानना है
    मेरा भारत सब देशों से महान है,
    जाति, धर्म का है जहाँ अनूठा संगम,
    देशभक्ति की लहर में, भूल जाते सब गम,
    देश के लिए मर मिटने को सब है तैयार,
    अरे दुनिया वालों, हम है बहुत होशियार,
    न छेड़ो हमें, कासर नहीं है हम खबरदार,
    अपनी माँ को बचाने, लेगें हम भी हथियार।

    मेरा यह मानना है
    मेरा भारत सब देशों से महान है ।
    English explanation of this lyric please ..

  11. #26
    New Member Alok.nath's Avatar
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    सरफरोशी की तम्मना अब हमारे दिल में है
    देखना है जोर कितना बाजुए कातिल में है

    यही जमी थी यही गगन था
    यहीं का गाँधी वही शिवाजी
    यहीं भगत ने लड़ाई लड़ी
    इन सपूत्तों को समझलें
    यही समझ हर नर में है
    देखना है जोश कितना नवयुगी युवा में है....



    अंग्रेजों से लड़ गए थे वो
    भारत माँ को आजाद किया
    तोड़ जंजीरें दासता की
    एकता में भारत वर्ष सीया
    बहुत नमी थी लघु-लघु था
    पर पवन आजाद हुई
    इस आज़ादी का निशा अब हमारी पहचान में है
    देखना है महत्वा कितना इसका युवा दिल में है

    आजाद हुआ अपना जहान
    अब यहाँ सरकार बनी
    लोक राज में में और मेरा
    देश प्रेम की बलि चड़ी
    व्यस्त हुए सब खुद ही खुद में
    अपनी माँ को भूल गए
    जिस पीड़ी को काम था करना
    वो ही है बेकार पड़ी
    अपने कर्तव्यों को समझना अब जरुरत पहेल में है
    देखना है जागरूक कितना युवा अब इस देश में है


    क्रांति हमको चाहिए
    नहीं अब और बर्दास्त हो
    छुप के भावनाओं पे वार करें
    उस नेता का पर्दा फाश हो
    देश के बदले राज्य को चाहे
    उसका अब तो नाश हो
    इन भेड़ों की हक़ुइक़त को जो जाने अब वो आवाज गुजने को है
    देखना है युवा कितना अब उसक साथ में है

    सरफरोशी की तम्मना अब हमारे दिल में है
    युवा हम आवाज बने,आग वो इस लघु में है
    नहीं किसी का इन्तेजार करें अब
    हम खुद ही इम्तिहान फिर परिणाम भी दें
    माँ हमारी बेबस पड़ी है
    उसका हम अब उधार करें
    ना ही दौलत और ना शोहरत
    फिर से सवतंत्र संग्राम लड़ो
    सरकार ने चूड़ी पेहन राखी है
    मैंने तलवार की अब लाज रखी
    चल पड़ी हूँ ......अब निगाह तो राह में है
    देखना है युवा कितना अब मेरी ही पनाह में है .....................


    सरफरोशी की तम्मना अब हमारे दिल में है
    देखना है जोर कितना बाजुए कातिल में है


    Writer : Unknown

  12. #27
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    आजादी की सौंधी खुशबू,
    जब नथुनों में भर आती है,
    सर उठाकर जीने की,
    तब आदत सी हो जाती है|

    संघर्ष किया था जब सबने,
    वो साल पुराना लगता है,
    खून बहाया था जिसने,
    वो भाई बेगाना लगता है|

    बापू की तस्वीर पर,
    बस फूल चड़ाए जाते हैं,
    १०% कमीशन पर,
    सब काम कराये जाते हैं|

    आजादी बोले कुछ, तू सुन,
    ६३ साल की हो गयी हूँ में,
    अब मुझमें वैसी बात नहीं,
    मेरे बूढ़े कन्धों में अब,
    पहले जैसी जान नहीं|

    मेरे बच्चों अब तुम पर है,
    की देश का आगे क्या कुछ हो,
    अपने सपने तुम खुद देखो,
    तुम खुद ही उन्हें साकार करो|

    हे माँ तू ऐसा क्यों बोले,
    तूने तो बहुत कुछ है दिया,
    हिम्मत, सोच और इज्जत का,
    जीवन में हमारे प्रकाश किया|

    महनत करेंगे सब मिलकर,
    देश को आगे ले जायेंगे,
    ज़रुरत पड़ी तो फिर एक बार,
    हम अपना लहू बहाएंगे|

    देश मेरे देश मेरे,
    तू ही मेरा तीर्थ है,
    तू ही मेरे चारों धाम,
    मैं जी लूँगा फिर और कभी,
    इस बार करी जां तेरे नाम|

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