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Thread: Patriotic Poems Hindi ( देशभक्ति कविताएँ )

  1. #1
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    Sep 2009
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    Default Patriotic Poems Hindi ( देशभक्ति कविताएँ )

    घोर अंधकार हो,
    चल रही बयार हो,
    आज द्वार-द्वार पर यह दिया बुझे नहीं
    यह निशीथ का दिया ला रहा विहान है।
    शक्ति का दिया हुआ,
    शक्ति को दिया हुआ,
    भक्ति से दिया हुआ,
    यह स्वतंत्रता-दिया,
    रुक रही न नाव हो
    ज़ोर का बहाव हो,
    आज गंग-धार पर यह दिया बुझे नहीं,
    यह स्वदेश का दिया प्राण के समान है।

    यह अतीत कल्पना,
    यह विनीत प्रार्थना,
    यह पुनीत भावना,
    यह अनंत साधना,
    शांति हो, अशांति हो,
    युद्ध, संधि, क्रांति हो,
    तीर पर, कछार पर, यह दिया बुझे नहीं,
    देश पर, समाज पर, ज्योति का वितान है।

    तीन-चार फूल है,
    आस-पास धूल है,
    बाँस है -बबूल है,
    घास के दुकूल है,
    वायु भी हिलोर दे,
    फूँक दे, चकोर दे,
    कब्र पर मज़ार पर, यह दिया बुझे नहीं,
    यह किसी शहीद का पुण्य-प्राण दान है।

    झूम-झूम बदलियाँ
    चूम-चूम बिजलियाँ
    आँधियाँ उठा रहीं
    हलचलें मचा रहीं
    लड़ रहा स्वदेश हो,
    यातना विशेष हो,
    क्षुद्र जीत-हार पर, यह दिया बुझे नहीं,
    यह स्वतंत्र भावना का स्वतंत्र गान है।

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  2. #2
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    Default शहीद की मां को प्रणाम

    कर गयी पैदा तुझे उस कोख का एहसान है
    सैनिकों के रक्त से आबाद हिन्दुस्तान है
    तिलक किया मस्तक चूमा बोली ये ले कफन तुम्हारा
    मैं मां हूं पर बाद में, पहले बेटा वतन तुम्हारा
    धन्य है मैया तुम्हारी भेंट में बलिदान में
    झुक गया है देश उसके दूध के सम्मान में
    दे दिया है लाल जिसने पुत्र मोह छोड़कर
    चाहता हूं आंसुओं से पांव वो पखार दूं
    ए शहीद की मां आ तेरी मैं आरती उतार लूं

  3. #3
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    Default

    केरल से करगिल घाटी तक
    गौहाटी से चौपाटी तक
    सारा देश हमारा


    जीना हो तो मरना सीखो
    गूँज उठे यह नारा -
    केरल से करगिल घाटी तक
    सारा देश हमारा,

    लगता है ताज़े लोहू पर जमी हुई है काई
    लगता है फिर भटक गई है भारत की तरुणाई
    काई चीरो ओ रणधीरों!
    ओ जननी की भाग्य लकीरों
    बलिदानों का पुण्य मुहूरत आता नहीं दुबारा


    जीना हो तो मरना सीखो गूँज उठे यह नारा -
    केरल से करगिल घाटी तक
    सारा देश हमारा,

    घायल अपना ताजमहल है, घायल गंगा मैया
    टूट रहे हैं तूफ़ानों में नैया और खिवैया
    तुम नैया के पाल बदल दो
    तूफ़ानों की चाल बदल दो
    हर आँधी का उत्तर हो तुम, तुमने नहीं विचारा


    जीना हो तो मरना सीखो गूँज उठे यह नारा -
    केरल से करगिल घाटी तक
    सारा देश हमारा,


    कहीं तुम्हें परबत लड़वा दे, कहीं लड़ा दे पानी
    भाषा के नारों में गुप्त है, मन की मीठी बानी
    आग लगा दो इन नारों में
    इज़्ज़त आ गई बाज़ारों में
    कब जागेंगे सोये सूरज! कब होगा उजियारा

    जीना हो तो मरना सीखो, गूँज उठे यह नारा -
    केरल से करगिल घाटी तक
    सारा देश हमारा


    संकट अपना बाल सखा है, इसको कठ लगाओ
    क्या बैठे हो न्यारे-न्यारे मिल कर बोझ उठाओ
    भाग्य भरोसा कायरता है
    कर्मठ देश कहाँ मरता है?
    सोचो तुमने इतने दिन में कितनी बार हुँकारा

    जीना हो तो मरना सीखो गूँज उठे यह नारा
    केरल से करगिल घाटी तक
    सारा देश हमारा



  4. #4
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    नदी, झील, झरनों की झाँकी मनमोहक है,
    सुमनों से सजी घाटी-घाटी मेरे देश की।
    सुरसरिता-सी सौम्य संस्कृति की सुवास,
    विश्व भर में गई है बाँटी मेरे देश की।


    पूरी धऱती को एक परिवार मानने की,
    पावन प्रणम्य परिपाटी मेरे देश की।
    शत-शत बार बंदनीय अभिनंदनीय,
    चंदन से कम नहीं माटी मेरे देश की।।

    कान्हा की कला पे रीझकर भक्ति भावना
    के, छंद रचते हैं रसखान मेरे देश में।
    तुलसी के साथ में रहीम से मुसलमान,
    है निभाते कविता की आन मेरे देश में।


    बिसमिल और अशफाक से उदाहरण,
    साथ-साथ होते कुरबान मेरे देश में।
    जब भी ज़रूरत पड़ी है तब-तब हुए,
    एक हिंदू व मुसलमान मेरे देश में।

  5. #5
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    very good deshbhakti kavita- abid agwan ,saudi arab

  6. #6
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    Default Vandemataram - Patriotic Poem

    वन्देमातरम गीत नहीं मैं मंत्र हूँ जीने-मरने का|
    बना रहे हथियार मुझे क्यों अपनो से ही लड़ने का|

    जिनने अपनाया मुझको वे सबकुछ अपना भूल गए,
    मात्रु -भूमि पर जिए-मरे हंस-हंस फंसी पर झूल गए|
    वीर शिवा,राणा,हमीद लक्ष्मीबाई से अभिमानी,
    भगतसिंह,आजाद,राज,सुख औ बिस्मिल से बलिदानी|
    अवसर चूक न जाना उनके पद-चिन्हों पर चलने का
    वन्देमातरम गीत नहीं मैं मंत्र हूँ जीने-मरने का|

    करनेवाले काम बहुत हैं व्यर्थ उलझनों को छोड़ो,
    मुल्ला-पंडित तोड़ रहे हैं तुम खुद अपनों को जोड़ो|
    भूख,बीमारी,बेकारी,दहशत गर्दी को मिटाना है,
    ग्लोबल-वार्मिंग चुनौती से अपना विश्व बचाना है|
    हम बदलें तो युग बदले बस मंत्र यही है सुधरने का
    वन्देमातरम गीत नहीं मैं मंत्र हूँ जीने-मरने का|

    चंदा-तारे सुख देते पर पोषण कभी नहीं देते,
    केवल धरती माँ से ही ये वृक्ष जीवन रस लेते|

    जननी और जन्म-भूमि को ज़न्नत से बढ़कर मानें,
    पूर्वज सारे एक हमारे इसी तथ्य को पहचानें|
    जागो-जागो यही समय है अपनीं जड़ें पकडनें का|
    वन्देमातरम गीत नहीं मैं मंत्र हूँ जीने-मरने का|

  7. #7
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    Default अमर शहीद रामप्रसाद 'बिस्मिल'

    Shaheed Ram Prasad Bismil - Hindi Patriotic Poem

    अरूजे कामयाबी पर कभी तो हिन्दुस्तां होगा ।
    रिहा सैयाद के हाथों से अपना आशियां होगा ।।

    चखायेगे मजा बरबादिये गुलशन का गुलची को ।
    बहार आयेगी उस दिन जब कि अपना बागवां होगा ।।

    वतन की आबरू का पास देखें कौन करता है ।
    सुना है आज मकतल में हमारा इम्तहां होगा ।।

    जुदा मत हो मेरे पहलू से ऐ दर्दें वतन हरगिज ।
    न जाने बाद मुर्दन मैं कहां.. और तू कहां होगा ।।

    यह आये दिन को छेड़ अच्छी नहीं ऐ खंजरे कातिल !
    बता कब फैसला उनके हमारे दरमियां होगा ।।

    शहीदों की चिताओं पर जुड़ेगें हर बरस मेले ।
    वतन पर मरने वालों का यही बाकी निशां होगा ।।

    इलाही वह भी दिन होगा जब अपना राज्य देखेंगे ।
    जब अपनी ही जमीं होगी और अपना आसमां होगा ।।

  8. #8
    Member Nidhi_malhotra's Avatar
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    Default Ram Prasad Bismil - Patriotic Poem

    भारत जननि तेरी जय हो विजय हो ।
    तू शुद्ध और बुद्ध ज्ञान की आगार,
    तेरी विजय सूर्य माता उदय हो ।।
    हों ज्ञान सम्पन्न जीवन सुफल होवे,
    सन्तान तेरी अखिल प्रेममय हो ।।
    आयें पुनः कृष्ण देखें द्शा तेरी,
    सरिता सरों में भी बहता प्रणय हो ।।
    सावर के संकल्प पूरण करें ईश,
    विध्न और बाधा सभी का प्रलय हो ।।
    गांधी रहे और तिलक फिर यहां आवें,
    अरविंद, लाला महेन्द्र की जय हो ।।
    तेरे लिये जेल हो स्वर्ग का द्वार,
    बेड़ी की झन-झन बीणा की लय हो ।।
    कहता खलल आज हिन्दू-मुसलमान,
    सब मिल के गाओं जननि तेरी जय हो ।।

    - अमर शहीद रामप्रसाद 'बिस्मिल'

  9. #9
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    Default Hindi Patriotic Poem

    मेरा भारत महान

    वीर चले है देखो लड़ने,
    दुश्मन से सरहद पर भिड़ने,
    तिरंगा शान से लहराता,
    शुभाशीष दे भारतमाता,

    जोश से सीने लगे है फूलने,
    कदम लगे है आगे चलने,
    अपनों से ले रहे बिदाई,
    माँ की छाती है भर आई,

    शहीद हो पर ना पीठ दिखाना,
    भारत माँ की लाज बचाना,
    हुक्म यहाँ की माँ है करती,
    बेटे की कुर्बानी से नहीं डरती,

    दोनों ही करते है कुर्बान,
    माँ ममता को,जान को जवान,
    इसीलिए तो है मेरा भारत महान
    सबका प्यारा हिन्दुस्थान

  10. #10
    Member Nidhi_malhotra's Avatar
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    यह हिंदुस्तान है अपना
    हमारे युग-युग का सपना
    हरी धरती है नीलगगन
    मगन हम पंछी अलबेले

    मुकुट-सा हिमगिरि अति सुंदर
    चरण रज लेता रत्नाकर
    हृदय गंगा यमुना बहती
    लगें छ: ऋतुओं के मेले

    राम-घनश्याम यहाँ घूमे
    सूर-तुलसी के स्वर झूमे
    बोस-गांधी ने जन्म लिया
    जान पर हँस-हँस जो खेले

    कर्म पथ पर यह सदा चला
    ज्ञान का दीपक यहाँ जला
    विश्व में इसकी समता क्या
    रहे हैं सब इसके चेले।

    - डॉ. गोपालबाबू शर्मा

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